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internet protocol in hindi (TCP/IP) प्रोटोकॉल के प्रकार


internet protocol in hindi (TCP/IP) प्रोटोकॉल के प्रकार


हैलो दोस्तों आज मै बताने वाला हूँ internet protocol in hindi में और TCP/IP प्रोटोकॉल किसे कहते हैं? और साथ ही TCP/IP प्रोटोकॉल कैसे काम करती है। 


internet protocol in hindi (TCP/IP) प्रोटोकॉल के प्रकार
internet protocol in hindi (TCP/IP) प्रोटोकॉल के प्रकार




इंटरनेट प्रोटोकॉल नियमों का वह समूह होता है, जिसका पालन सारा कंप्यूटर कम्युनिकेशन के दौरान करता है। जब कंप्यूटर पर डाटा संचार होता है, तब सभी कंप्यूटर को किसी न किसी नेटवर्क के साथ जोड़ना पड़ता है, कंप्यूटर के कम्युनिकेशन के बाद डाटा का संचार सफलतापूर्वक हो जाए, जिसके लिए प्रत्येक कंप्यूटर या डिवाइस को इस नियम का पालन करना होता है। इसी नियम को internet protocol कहते हैं।


TCP/IP प्रोटोकॉल किसे कहते हैं?


TCP/IP(Transmission control protocol/ internet protocol)-


TCP/IP, एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा ट्रांसमिशन करने के दौरान पालन किए जाने वाले नियमों का समूह होता है, जिसका पालन कंप्यूटर एक दूसरे के साथ network जैसे internet पर कम्युनिकेट करने के लिए करते हैं। कंप्यूटर बहुत सारे काम को एक साथ करने की ताकत रखता है, मगर इसकी ताकत को network communication के दौरान ही जाना जा सकता है।




कंप्यूटर से इन्टरनेट पर कोई भी WORK किया जा सकता है, जैसे इंटरनेट पर चैटिंग करना, फेसबुक पर मैसेज करना, ईमेल करना इत्यादि। इन सब कार्यों को हम आसानी से कर पाते हैं क्योंकि कंप्यूटर एक दूसरे कंप्यूटर के साथ किसी न किसी इंटरनेट नेटवर्क से कम्युनिकेट यानी जुड़े होते हैं, फिर वह कंप्यूटर कैसा भी हो, कहीं भी हो, किसी भी कंपनी या ब्रांड का हो और कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल हुआ हो, कोई फर्क फर्क नहीं पड़ता। इन सभी कार्यों के लिए कंप्यूटर को internet network के साथ इंटरनेट प्रोटोकोल के मदद से कम्युनिकेट करना पड़ता है।


इंटरनेट प्रोटोकॉल नियमों का वह समूह होता है, जिसका पालन सारा कंप्यूटर कम्युनिकेशन के दौरान करता है। जब कंप्यूटर पर डाटा संचार होता है, तब सभी कंप्यूटर को किसी न किसी नेटवर्क के साथ जोड़ना पड़ता है, कंप्यूटर के कम्युनिकेशन के बाद डाटा का संचार सफलतापूर्वक हो जाए, जिसके लिए प्रत्येक कंप्यूटर या डिवाइस को इस नियम का पालन करना होता है। इसी नियम को internet protocol कहते हैं।


दोस्तों यह नियम वही होता है जो हम सब पालन करते हैं, जैसे - सड़क पर जाते समय दाएं और पाएं आने जाने का नियम और आमतौर पर किससे किस प्रकार बात किया जाय, की वह हमारे किसी भी काम को करने के लिए कन्वेंस हो जाए। नियम तो दुनिया के सभी क्षेत्रों में बने होते हैं फिर चाहे रेलवे स्टेशन हों या स्कूल हो, वैज्ञानिक अनुसंधान हों, अस्पताल हो, कंपनी हो और चाहे एयरपोर्ट हो। 


दोस्तों ठीक इसी तरह कंप्यूटर भी एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट हो पाएं और डाटा ट्रांसमिशन कर पाएं, जिसके लिए नियम बनाए गए हैं। इन्ही नियमों को TCP/IP कहते हैं।



TCP/IP प्रोटोकॉल किसे कहते हैं?

 

दोस्तों TCP/IP एक ऐसा protocol है, जिनके द्वारा इंटरनेट नेटवर्क या अन्य किसी इंटरनेट डिवाइस के बीच सूचनाओं का आदान - प्रदान होता होता है। इंटरनेट प्रोटोकॉल, सूचनाओं का आदान - प्रदान सही वे में हो सके, जिसके लिए ये प्रोटोकॉल एक गाइडलाइन पारित करता है। इसी गाइडलाइन को दुनिया की सभी नेटवर्किंग कंपनियां नेटवर्क प्रोडक्ट को बनाते समय पालन करती हैं, फिर चाहे वह प्रोडक्ट हार्डवेयर में हो या सॉफ्टवेयर में। 


दोस्तों TCP/IP का implementation लगभग सभी प्रकार के हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम पर सामान्य रूप से काम करता है। यही वजह है कि किसी भी प्रकार के नेटवर्क TCP/IP के माध्यम से एक दूसरे से कनेक्ट हो पाते हैं। दोस्तों इसका प्रयोग सूचनाओं को सुरक्षित ढंग से भेजने के लिए किया जाता है। TCP/IP डाटा को एक नेटवर्क के जरिए एक कंप्यूटर नेटवर्क से दूसरे कंप्यूटर नेटवर्क में ट्रांसफर करने का कार्य करता है।




TCP/IP का उपयोग-


दोस्तों प्रोटोकॉल एक नियम या विधि होती है, जिसका उपयोग इंटरनेट से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा भेजने के लिए किया जाता है।

दोस्तों जब हम अपने कंप्यूटर में काम करते हैं, तो कभी - कभी हम किसी भी फाइल को या डाटा को अपने कंप्यूटर में internet के माध्यम से अपलोड या डाउनलोड करते हैं, इस प्रक्रिया को TCP/IP से कंट्रोल किया जाता है। दोस्तों जब कोई फाइल डाटा इंटरनेट के माध्यम से अपलोड या डाउनलोड होती है, तो यह प्रक्रिया एक पैकेज के रूप में होता है और इस पैकेज में डाटा का समूह होता है। TCP/IP का कार्य इसी डाटा को डाउनलोड या अपलोड होते समय ही कंट्रोल करना होता है।


TCP/IP काम कैसे करती है?


दोस्तों TCP/IP internet पर दो कंप्यूटरों के बीच कम्युनेशन किया जाने वाला प्रोटोकॉल है। यह प्रोटोकॉल इंटरनेट के माध्यम से किसी दो कंप्यूटरों के बीच डाटा ट्रांसफर करने का कार्य करता है और साथ ही दो कंप्यूटरों के बीच कम्युनिकेशन की सुविधा प्रदान करता है। दोस्तों ये जो प्रोटोकॉल होते हैं, डाटा को सुरक्षित रखते हुए, उसके सही जगहों पर पहुंचाने का कार्य करते हैं। Protocol के दो भाग होते हैं। TCP और IP


इंटरनेट प्रोटोकॉल इन हिंदी


TCP ( transmission control protocol)

दोस्तों यह इंटरनेट पर डाटा को छोटे - छोटे भागों में बांटने का कार्य करता है, जिसका उपयोग इंटरनेट पर डाटा ट्रांसफर के लिए किया जाता है। दोस्तों यह किसी फाइल्स या इन्फॉर्मेशन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में सहायक होता है।


IP ( internet protocol)-

दोस्तों द्वारा भाग आईपी होता है, जो TCP के द्वारा बांटे गए डाटा के पैकेज का एड्रेस चेक करके उसके सही एड्रेस बताता है, ताकि सभी पैकेज सुरक्षित और सही रास्ते से भेजा जा सके। दोस्तों TCP क्या करता है, कि डाटा को छोटे - छोटे डाटा पैकेज के रूप में बांट देता है और इंटरनेट में ट्रांसफर कर देता है। दोस्तों आईपी क्या करता है कि TCP द्वारा भेजे गए इस डाटा के छोटे - छोटे पैकेज को उसके निश्चित स्थान के कम्युनिकेशन प्वाइंट तक पहुंचता है, जिससे इंटरनेट और नेटवर्क के बीच compunication होना शुरू हो जाता है।


दोस्तों किसी भी नेटवर्क के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल टीसीपी या आईपी होता है, जो बहुत सारे protocol से मिलकर बना होता है। दोस्तों यही कारण है की इसे TCP/IP protocol Suite या TCP/IP protocol रिफरेंस मॉडल कहा जाता है, जिसमें चार लेयर पाए जाते हैं।


Application layer

Transport layer (TCP/UDP)

Internet layer (IP)

Network Layer( ARP)


दोस्तों यही लेयर protocol को डाटा ट्रांसफर करने में सहायक होते हैं। ये लेयर टीसीपी द्वारा डाटा को सेंडर से विभाजित पैकेज को लेकर रिसीवर को देता है। इन सभी लेयर के कार्य अलग अलग होते हैं।



Application layer-

दोस्तों ये लेयर टीसीपी/आईपी मॉडल की ऊपरी लेयर होती है, जो कंप्यूटर एप्लीकेशन को नेटवर्क सर्विस प्रोवाइड करने में मदद करता है और यूजर को कम्युनिकेशन के लिए इंटरफेस उपलब्ध कराता है। इसमें यूजर अपने विभिन्न एप्लीकेशन जैसे ब्राउजर, FTP, email के साथ काम करता है। दोस्तों इस लेयर का काम ट्रांसपोर्ट लेयर को डाटा भेजने और उसके डाटा को रिसीव करने के लिए होता है। यह लेयर काम कर सके उसके लिए यह अपने साथ बहुत सारे प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है जैसे -


HTTP(hypertext transfer protocol)

DNS((Domain name system)

FTP(File transfer protocol)

TFTP(Trivial File Transfer Protocol)

SMTP(simple mail transfer protocol)

TELNET(telecommunication network)


Transport layer- 

दोस्तों इस लेयर का कार्य डाटा ट्रांसफर के लिए होता है। दोस्तों यह लेयर बहुत सारे नेटवर्क होस्ट कंप्यूटर के मध्य  कम्युनिकेशन निर्धारित करता है। इस लेयर में एरर चेकिंग और फ्लो कंट्रोल भी होता है, जिसका काम किसी भी डाटा को उसके सही जगह पहुंचाने के लिए होता है। इस लेयर में दो मुख्य protocol का इस्तेमाल होता है।


TCP (transmission control protocol)

UDP( user datagram protocol)


TCP (transmission control protocol)-


दोस्तों इस लेयर में TCP और UDP प्रोटोकोल में भेजी जाने वाली बड़ी सूचना को एप्लीकेशन लेयर से प्राप्त करके छोटे छोटे टुकड़ों में विभाजित करके इंटरनेट लेयर में भेजते हैं। इसमें टीसीपी अधिक reliable और  connection oriented यानि भरोसेमंद प्रोटोकॉल होता है। दोस्तों इसका मतलब यह है की टीसीपी डाटा ट्रांसफर करने से पहले reliable connection करता है, फिर उसके बाद ही डाटा ट्रांसफर करता है। टीसीपी में डाटा पहुंचने की फुल सिक्योरिटी होती है, जिसे टीसीपी को reliable protocol कहा जाता है।





UDP( user datagram protocol)-


दोस्तों यह एक कनेक्शनलेस प्रोटोकोल होता है, जो किसी भी डाटा को ट्रांसफर करते समय कोई भी कनेक्शन स्थापित नहीं करता और न यह डाटा ट्रांसमिशन की सिक्योरिटी देता है।


Internet layer-


दोस्तों यह लेयर नेटवर्क में एक connectionless कम्युनिकेशन देता है, जिसका कार्य अलग नेटवर्क या  होस्ट के मध्य आपस में कम्युनिकेट करने के लिए होता है। दोस्तों इस लेयर में ट्रांसपोर्ट लेयर से छोटे छोटे टुकड़ों में डाटा प्राप्त करके ip datagram के फॉर्मेट में पैकेज किया जाता है। यह datagram source और destination ip address को content किए रहते हैं, जिससे डाटा को बहुत ही आसानी से प्राप्त और भेजा जा सके। इस लेयर में कई लेयर काम करते हैं जैसे -

 

IP ( internet protocol)

ICMP ( internet control message protocol)

ARP ( address resolution protocol)

RARP ( Reverse address resolution protocol)

IGMP( internet group management protocol)


Network access layer -

दोस्तों यह लेयर सबसे नीचे वाली लेयर होती है, जो डाटा नेटवर्क में किस प्रकार भेजा और प्राप्त किया जाता है। इस लेयर में किसी न किसी नेटवर्किंग डिवाइस जैसे की NIC, WiFi, bluetooth, DSL आदि का उपयोग होता है, जिसका काम बहुत सारे कंप्यूटर को एक सर्वर से जोड़ने के लिए होता है। दोस्तों इस लेयर में जो डाटा होता है, वह एक पैकेज के रूप में होता है, जिसे उसके सही जगह तक पहुंचने का काम नेटवर्क लेयर करता है।




इसे भी पढ़ें- What is a vpn server ? VPN के टॉप 5 जानकारी हिंदी में।


दोस्तों इस तरह इन चार लेयर की मदद से TCP/IP डाटा ट्रांसफर करता है।


Protocol के प्रकार-


HTTPS (hypertext transfer protocol secure)-


दोस्तों इसका उपयोग इंटरनेट से वेब पेज को एक्सेस करने के लिए किया जाता है। हम इंटरनेट पर जब किसी भी website को ओपन करते हैं, तो उसे एक्सेस करने के लिए हमे किसी न किसी ब्राउजर का इस्तेमाल करना पड़ता है, जब की यह सभी wabsite एक सर्वर पर रहता है, जिसे एक्सेस करने के लिए https मदद करता है। यह दो तरह के होते हैं http और https। जिस वेब पेज को एक्सेस करने में ज्यादा सिक्युरिटी की आवश्यकता होती है, उसमें https का इस्तेमाल होता है और unsecurity के लिए http (hypertext transfir protocol)  का इस्तेमाल होता है। यह वेब सर्वर और यूजर के बीच कनेक्शन बनाता है और यूजर द्वारा इंटरनेट पर खोजे जाने वाले query तक पहुंचाने के लिए उपयोगी होता है।




SMTP (simple mail transfer protocol)-


इस प्रोटोकॉल का उपयोग इंटरनेट के माध्यम से मेल भेजने के लिए किया जाता है। 


POP3( Post office protocol)-

इस प्रोटोकॉल का उपयोग मेल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। 


FTP(File transfer protocol)-

दोस्तों इस प्रोटोकॉल का उपयोग इंटरनेट से किसी भी फाइल को अपलोड और डाउनलोड करने मे किया जाता है। यह प्रोटोकॉल सूचनाओं को ट्रांसफर करने के लिए टीसीपी/आईपी प्रोटोकॉल की मदद लेता है। दोस्तों FTP एक प्रोटेक्टेबल protocol होता है, जिसे on करने के लिए टीसीपी/आईपी प्रोटोकॉल की आवश्यकता पड़ती है। दोस्तों अगर हमारे कंप्यूटर नेटवर्क प्रोटोकॉल का यह प्रोटोकॉल यानी FTP प्रोटोकोल अगर on रहेगा तभी इंटरनेट से फाइल को डाउनलोड या अपलोड कर पाएंगे।





Telnet-

दोस्तों इसका पूरा नाम telecommunication network होता है। इसका उपयोग रिमोट लॉगिन करने में किया जाता है। दोस्तों TELNET कहने का मतलब यह होता है की जब हम किसी दूर रखे सिस्टम या लैपटॉप को पास वाले कंप्यूटर नेटवर्क से एक्सेस कर पाते हैं, तो दूर वाले सिस्टम को एक्सेस करने के लिए टेलनेट प्रोटोकोल की आवश्यकता होती है और एक्सेस करने के लिए इंटरनेट पर बहुत सारे tool, software का इस्तेमाल होता है। जैसे - एनिडेक्स आदि।


DNS(Domain name system)-

दोस्तों अब अगर बात करें की DNS का उपयोग क्या होता है, तो उससे पहले दो प्वाइंट बताने वाला हूं। पहला है डोमेन नेम क्या होता है, तो डोमेन नेम किसी भी वेबसाइट को ओपन करते हैं जैसे -

www.geniusecomputertech.in तो .in, .com, .org आदि ये सब किसी भी साईट का डोमेन नेम होता है। यहां कोई भी डोमेन नेम हमे यह बताता है, की वह वेबसाइट किस क्षेत्र से संबंधित है। दूसरा प्वाइंट यह है की हर सिस्टम का एक आईपी एड्रेस होता है, जैसे -192.160.1.00 तो कहने का मतलब यह है की हम अपने कंप्यूटर या मोबाइल से किसी भी वेबसाइट को ओपन करते है तो हमारे कंप्यूटर या मोबाइल में उपस्थित आईपी एड्रेस ही किसी भी वेबसाइट के डोमेन नेम को कॉल करता है और बताता है की मेरे कंप्यूटर या मोबाइल में ओपन हो जाओ। और सरल भाषा में कहें तो डीएनएस, डोमेन नेम और आईपी एड्रेस के बीच लिंकअप करता है। दोस्तों किसी भी वेबसाइट को आईपी एड्रेस कॉल कर पाए उसके लिए DNS प्रोटोकॉल मदद करता है।



ARP-

इसका पूरा नाम address resoulation protocol होता है। अगर इसके उपयोग के बारे में कहें तो यह क्या करता है, कि ip address और Mac address के बीच लिंकउप करवाता है। 


DHCP-

दोस्तों इसका पूरा नाम dainamic host configration protocol होता है, जो किसी भी नेटवर्क डिवाइस को आईपी अड्रेस देता है। 


ICMP-

दोस्तों इसका उपयोग मेल प्राप्त करने के लिये होता है। इसका पूरा नाम internet control massage protocol होता है।


निष्कर्ष-

दोस्तों आज हमने इस पोस्ट में internet protocol in hindi (TCP/IP) और प्रोटोकॉल के प्रकार बताया है। अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमेन्ट करके जरूर बताना।


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